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हम बाबासाहब को तो मानते है पर बाबासाहब की नहीं मानते

babasaheb-ambedkar speaking

  डाॅ मनीषा बांगरडॉ. जे डी चन्द्रपाल  जब तक साँस चलती रहती है तब तक जीवन चलता रहता है; मगर जब साँस रूक जाती है तो जीवन समाप्त हो जाता है | मगर क्या किसी महान व्यक्ति का जीवन उनकी साँस रूकने पर थम जाता है ?  ऐसा कहा जाता है की किसी व्यकित की …