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Gender

Why Not Janeu Under My Kurta?

Rahmath EP

  Rahmath EP Lipstick Under My Burkha is a ‘by the Brahmin for the Brahmin’ movie to propagate the Savarna definition of the ‘oppressed women’. The whole movie gives you a clear picture of the story of women’s assertion on their personal and sexual liberation through brahminical patriarchal narration filled with Islamophobia by projecting Muslim …

Features

वे अपनी आंखों में समानता स्वतंत्रता का नीला सपना लिए चले थे

anita bharti

  अनिता भारती (Anita Bharti) ओम प्रकाश वाल्मीकि जी को याद करते हुए हमने अपनी समूची घृणा को/ पारदर्शी पत्‍तों में लपेटकर/ ठूँठे वृक्ष की नंगी टहनियों पर टाँग दिया है/ताकि आने वाले समय में/ ताज़े लहू से महकती सड़कों पर/ नंगे पाँव दौड़ते सख़्त चेहरों वाले साँवले बच्‍चे/ देख सकें कर सकें प्‍यार/दुश्‍मनों के बच्‍चों में/ अतीत …

Features

‘अनारकली ऑफ आरा’: हाशिये के समाज की हौसले से लबरेज बगावत…!

arvind shesh new

  अरविंद शेष (Arvind Shesh) दुख से पैदा हुआ जीवट जब दुख को पैदा करने वालों के सामने चुनौती फेंकता है तो आसमान से उम्मीद की बरसात होती है… और जमीन पर नए हौसले से लबरेज़ ख्वाबों की फसल लहलहाने लगती है…! दिसंबर, 2016 में पंजाब के बठिंडा के किसी समारोह में एक गर्भवती महिला …

Assertion

A Discussion on Poetry Book ‘Akash Nila Hai’

bagi

  Kalyani The program was a book discussion of Bal Gangadhar ‘Bagi’s book “Akash Nila Hai”. The book is a collection of poetry which JNU Ph.D scholar Bal Gangadhar ‘Bagi’ has written over a period of his research duration at JNU. As the pen name of the poet ‘Bagi’ suggests, the poems have a spirit …

Features

आज़ाद भारत में डॉ. अंबेडकर का विस्तार – साहेब कांशी राम

Satvendra Madara

साहेब कांशी राम के जीवन पर एक संक्षिप्त रेखाचित्र Satvendar Madara (सतविंदर मदारा) भारत में बहुजन इंक़लाब लाने वाले साहब कांशी राम का जन्म 15 मार्च 1934 को उनके नैनिहाल गाँव पिरथी पुर बुंगा साहिब, जिला रोपड़, पंजाब में हुआ था, उनका अपना पैतृक गाँव खुआसपुर, जिला रोपड़ (अब रूपनगर), पंजाब था। उनके पिता का …

Assertion

त्यौहार

savarna avarana women

  Vruttant Manwatkar रसिक-रोमानी दिन है आएँहंगामे का ‘फैशन’ लाएँ.“अभिव्यक्ति की आज़ादी दो!”जीने का हक़ भाड़ में जाये. क्रांति दम्भ में लाल जवानीरंग, उत्सव में बदलती है. आज भी जब जब चौराहे परअवर्ण औरत जलती है.

Features

दलित का बेटा हूँ साहेब, शब्दों की रांपी ज़रा तेज है

anita b

  गुरिंदर आज़ाद के काव्य संग्रह ‘कंडीशन्स अप्लाई’ की समीक्षा Anita Bharti (अनिता भारती) युवा क्रांतिकारी कवि गुरिंदर आज़ाद दलित मुद्दों पर जितनी पावरफुल फिल्म बनाते है उतनी ही पावरफुल उनकी कविताएं है। क्योंकि कवि एक जागरुक सामाजिक कार्यकर्ता भी है इसलिए सामाजिक बदलाव व चेतना के जितने आयाम है वह उनसे रोज़-ब-रोज़ रुबरु होता …

Thought

जाति पाति: आदर्श और हक़ीकत (पंजाब के सन्दर्भ में)

s ajmer singh

  Sardar Ajmer Singh (सरदार अजमेर सिंह) (यह आलेख आज़ाद भारत के पंजाब प्रांत में दलित/पछड़ा वर्ग एवं सिख के ‘हम हिंदू नहीं’ दृष्टिकोण का ब्राह्मणवादी आर्य समाज और इसके पोषक बन गए राजनीतिक दलों के बरक्स जो भी हुआ है, उसका ऐतिहासिक विवरण है। पंजाब की राजनीति को देखने, समझने और परखने का, पाठकों …